नो चेत् (If not (like this))

न मा नो इति त्रयः अव्ययशब्दाः निषेधः इत्यर्थे प्रयुज्यते। यथा निवेदयामि शृणोतु नो चेत् न्यायालयं नेष्यामि।
अग्रे गीतं सरसकवयः पार्श्वयोर्दाक्षिणात्याः
पश्चाल्लीलावलयरणितं चामरग्राहिणीनाम्।
यद्यस्त्येवं कुरु भवरसास्वादने लम्पटत्वं
नो चेच्चेतः प्रविश सहसा निर्विकल्पे समाधौ॥वैराग्यशतकम्
नो चेत् चेतः –  चेतः चेतस् इति  प्रातिपदिकं सम्बोधनविभक्तिः एकवचनम्।
(If there be music playing in front of you, by your side expert poets from the South,
and behind you the courtesans waving fans and shaking their bracelets with a clinking sound, then indulge unstintingly in these worldly pleasures.
If not, O Mind, enter the realm of beatitude devoid of all thoughts.)
तद्यावदेतौ मत्पुत्रौ शिशुत्वात्त्वां शृगालं न जानीतः तावद् द्रुततरं गत्वा स्वजातीयानां मध्ये मिलितो भव। नो चेदाभ्यां हतो मृत्युपथं समेष्यसि। पञ्चतन्त्रम् – सिंहशृगालपुत्रयोः कथा।
मेरे ये पुत्र अपनी शिशुता के कारण जबतक यह नहीं जान जाते कि तुम शृगाल हो तबतक शीघ्र यहाँ से भाग जाओ और अपनी जाति के शृगालों में मिल जाओ। अन्यथा कभी इनके द्वारा मारे जाकर तुम मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।

२०१९-०२-०९ शनिवासरः (2019-02-09 Saturday)

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