असु क्षेपणे (to throw) – 3

परा असु

परास्तम् – निराकृतम् = प्रत्युक्तम्

परास्तवसुधा सुधाधिवसति  – त्यक्तवसुन्धरा चिरमधिवसति   (कि ५।२७)

परास्त –  निराकृत

अप असु

अपास्यात् – जह्यात् (छोड़ दें)

चीराण्यपास्याज्जनकस्य कन्या नेयं प्रतिज्ञा मम दत्तपूर्वा।

यथासुखं गच्छतु राजपुत्री वनं समग्रा सह सर्वरत्नैः  (रा २।३८।६)

जनक की पुत्री अपने वल्कलवस्त्र त्याग दें। मैं ने यह प्रतिज्ञा पहले नहीं की। राजपुत्री अपने  समस्त आभरणादियों के साथ यथासुख वनप्रस्थान करें ।

 

(वर्तते)

२०१६-११-१२ शनिवासरः (2016-11-12 Saturday)