असु क्षेपणे (to throw) – 2

प्रेरणेऽर्थे अस्यति इति असु धातोः सामान्यः प्रयोगः ।  असु धातु को सामान्यतः ‘दूर करना’ इस अर्थ में प्रयोग किया जाता है।

नीलकण्ठपरिभुक्तयौवनां तां विलोक्य जननी समाश्वसत् ।

भर्तृवल्लभतया हि मानसीं मातुरस्यति सुचं वधूजनः ।।

(कुमारसम्भवे ८।१२)

शिवेन परिभुक्तयौवनां पार्वतीं अवलोक्य तस्याः जननी अथवा मेना संतुतोष। तथा हि पतिवात्सल्येन मातुः मनोभवां शोकं निरस्यति

नीलकण्ठ (अथवा शिवजी) से सम्भोग किये गये पार्वती के यौवन को देखकर उसकी माँ मेना सन्तुष्ट हुई। वधूजन पुत्री अपने पति के प्रेम से ही अपनी माँ का मानसिक शोक को दूर करती हैं

 

(वर्तते)

२०१६-११-१२ शनिवासरः (2016-11-12 Saturday)