अन्यं हननम् (Another murder)


कभी छाँव देखी न पुण्य की, जले पाँव पाप की धूप में।
जो भी रूप तेरी दया का है, मुझे दे दरस उस रूप में।
मेरा मन अशान्त है ए प्रभु, मुझे शान्ति का वरदान दे॥

२०१४-१०-२० सोमवासरः (2014-10-20 Monday)